अजब है रंग दुनिया के
अजब है रंग दुनिया के अजब है रंग दुनिया के, सभी को अपना कहते हैं, बहन-भाई, मामा-चाचा, न जाने कितने रिश्तों में बंधे रहते हैं। ये दुनिया दिखावट की, ये रिश्ते दिखावट के, ये प्यार, ये शृंगार दिखावट का, ये कसमें-वादे दिखावट के। ये चमक-दमक दिखावट की, ये आँखों का धोखा है यारों, इन निर्मम रिश्तों पर अपना सब कुछ मत वारो। ये पल-पल तुम्हें रुलाएँगे, पल-पल मन को तड़पाएँगे, जिनके लिए जागे रात-रात भर, वही कभी आँखें दिखलाएँगे। ये आँखों का धोखा है यारों, इन रिश्तों पर सब कुछ न वारो, कभी तो, कैसे तो सुधर जाएँ, ऐसी आशा का दीप सँवारो। चलो कुछ अच्छा काम कर आएँ, किसी की राह में खुशियों के दीप जलाएँ। अमूल्य रत्न है जीवन अपना, इसे व्यर्थ न गँवाएँ, अमूल्य रत्न है जीवन अपना, इसे व्यर्थ न गँवाएँ। कुछ अच्छे कर्म कर आएँ, किसी का दामन खुशियों से भर आएँ, किसी उदास चेहरे पर फिर से मुस्कान की कलियाँ खिलाएँ। कुछ मोती बिखेरोगे, कुछ मोती गिराओगे, कुछ मोती बिखेरोगे, कुछ मोती लुटाओगे, और कुछ मोती तुम भी तो पाओगे। मुस्कानें बिखेरते चलें, दूसरों का दुःख समेटते चलें, प्रेम और करुणा के दीपक से हर अँधियारा मिटाते चलें। जी...